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हौसला

पेंच उलझते जा रहे थे मुश्किलें बढती जा रही थी बर्दाश्तगी छटपटाने लगी थी सांस घुंटने लगी थी लगता था जैसे हर मोड पर साज़िश शतरंज बिछाये है, मैं दांव चल नहीं रहा था और वो जीत कि ग़लतफहमी में … Continue reading

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