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उम्मीद

कहते हैं कि ‘उम्मीद’ पे दुनिया कायम हैं, इसलिए है उम्मीद तुझसे ही मेरी, कि जैसे है, सृष्टि को नियम से, नियम को परिश्रम से, तपिश को ठंडक से, रेगिस्तान को हरियाली से, क्षुधा को खुराक की, तृषा को जल … Continue reading

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