Category Archives: हिन्दी

एक नयी आस- एक नयी आश

मुरझाये हुए दिलों को, डूबते हुए हौंसलों को, सोएं हुए जज्बातों को, बुझते हुए सपनों को, हर एक को- एक ही आस एक नयी आस, एक नयी आश ! सपनों को जो दे नयी उड़ान, जज्बातों मे फूँक दे नयी … Continue reading

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वीर तुम बढे चलो .

दोस्तों ,सबको स्वतंत्रता दिन की बहुत शुभकामनाएँ .. मेरा यह काव्य उन सैनिको के लिए है जिनकी वजह से हम सब आज भी स्वतंत्र है और आज़ादी की साँस ले सकते है.. जो आज भी सीमाओं पे अडिग रह के … Continue reading

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ये दिल

हर गम भूल जाने को कहता है ये दिल, अब जख्म न सहने को कहता है ये दिल, टूट चूका ये जितना टूटना था- अब न ये टूट पायेगा, अब तो बिखरे टुकडो पे भी, रोने को न कहता है … Continue reading

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यादें…

बीते हुए कल से बनती है यादें, कभी हसाती तो कभी रुलातीं है यादें, होठों पे हंसी, आँखों में नमीं, हर पल कुछ, सिखाती हैं ये यादें, अपनों के प्यार की, बीते लम्हों की, हर पल याद दिलाती है ये … Continue reading

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नव वर्ष की शुभकामनाएँ…

हारे नहीं तूफानोंसे ले कर मन में विश्वास, वर्ष नया देखो आ पहुँचा लेकर एक नई आश.. अनगिनत विपदाएँ झेली, झेले कई दुःख दर्द, गर्द सभी झड़ जाए वो सब, ऐसा करें विकास..   वर्ष नया… जंग और आतंक, सियासी खेल … Continue reading

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पन्नी

मैं एक पन्नी हूँ और भटक रही हूँ यहाँ से वहाँ, वैसे ही जैसे मेरे ‘प्लास्टिक’ परिवार के बाकी सदस्य, फ़ैल रहे है  डगर-डगर और भटक रहे हैं नगर-नगर, सह रहीं हूँ  मैं लोगों कि बेदर्दी जो मुझे देखके मुंह … Continue reading

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तन्हाई

ये सूनापन ,ये उदासी का आलम , हम क्या सुनाये किसीको अपना गम, हालतों के मारे तड़पते यहाँ हम, ये तन्हाई ही है अब मेरी हमदम .. बहे जब अश्क इन आँखों से हमारी , ए खुदा! तुम तड़पते नहीं … Continue reading

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कहा न गया.

कहने पे आते तो बहोत कुछ था कहेने को, पर हाल-ए-दिल के सिवा हम से कुछ कहा न गया.. बाँट दी हर खुशी सब में, दुःख दर्द किसीका हम से देखा न गया.. बना के रख देते तस्वीर एक है … Continue reading

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आरक्षण

आरक्षण का ज़ोर है, आरक्षण का शोर है, आरक्षण का देश हमारा, आरक्षण चहुँ ओर है, ‘आरक्षण’ चाहे तो करवा दे ‘चक्का जाम’, आरक्षण के बिना नहीं चलती यहाँ ‘सरकार’ तमाम, यह ‘दान’ है या ‘वरदान’, नहीं जानता मैं, पर … Continue reading

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बता दे मुझे

मैं कौन हूँ मै जानु ना गर तू जाने तो बता दे मुझे, किन राहों में चलते जाना है कोई मंजिल का तो पता दे मुझे.. मैं खोई हु बस तेरी आश में एक अनजानी अनकही सी प्यास में, तू … Continue reading

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