Category Archives: हिन्दी

क्रांति तीर्थ

झांको कभी उनके जीवन में भी ज़रा झोंक दिया जिन्होंने जीवन को अपने, और अर्पण कर दिया अपना सब कुछ, मातृभूमि के चरणों में कितने अनाम हुए शहीद कितनों के नाम भी हम भूल गए, हमें आज़ाद देखने की धुन … Continue reading

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मैं पतंग बन जाऊँ… 2…

Main Patang Ban Jaaun – Part II I get to travel a lot due to my postings at various places, which give me a chance to know of the ‘diverse’ culture and traditions of our country. I realized how rightly … Continue reading

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रूद्र तांडव

हर गली नुक्कड़ पे हर रस्ते चौराहे पे ‘वहशी- दरिंदे’ पल पल उभरते हैं जैसे भयानक चेहरे, हों अनगिनत शीश इनके, वही सूरत हर जगह हैं मैं किस किस से लडूं ! लाख चाहूँ पर रोक ना पाऊँ खौलती हैं … Continue reading

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जिंदगी

हर पल एक नया मोड हैं जिंदगी हर सुबह कि एक नयी किरण हैं जिंदगी समंदर में बहती लहरों कि तरह बहती हुयी एक लहर हैं जिंदगी देती हैं कई जख्म ये और उन्ही जख्मों को सीना सिखाती है टूटे … Continue reading

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फिर जिंदगी को सुरीला बना दिया…

This poem is dedicated to – Atul ji, and the lovely blog ‘atulsongaday.me’, to all ‘team Atul members’, dedicated to all my seniors, fellow contributors on this blog, well wishers and supporters of the blog; http://atulsongaday.me/ फिर जिंदगी को सुरीला … Continue reading

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हर दिन – होली हैं

प्रकृति के रंग अनेक इंसानों के ढंग अनेक सुख दुःख की होती यहाँ आँख मिचौली हैं जीवन के रंग मंच पर तो भाई, हर दिन – “होली हैं”

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‘घोटालों’ का ‘नव-युग’ आया . . .

मन में उमड़ रहा ‘घोटालों’ का ‘गुबार’ हैं आओ यारों गाएं हम खुशी के गीत झूमे गाकर अपना राग, अपनी लय, अपनी ताल, और अपना संगीत, देश भी अपना माल भी अपना अपनी ही सरकार अरे मौज उडाओं यारों किस … Continue reading

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दीवाने

सुकून ए दिल के लिए दर्द भी गँवारा करते है, हम वो दीवाने है जॉं इश्क में गुज़ारा करते है.. डूब जाती है मजबूरियां आशिकों के साथ समंदर में, हम वो खुशकिस्मत है जो आँखों में समंदर उतारा करते है.. … Continue reading

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Yeh Jo Desh Hai Tera ………

प्रजा से अभी भी कोसों दूर – ‘सत्ता’,‘तंत्र’ ! देश आज ६४ वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. इन ६४ सालों में निश्चित तौर पर हमने प्रगति की है. विकास हुआ हैं. लेकिन साथ ही साथ हमने ‘मूल्यों’ को खो … Continue reading

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‘तूफ़ान’ से ‘अप-डाउन’

रोज के ‘अप –डाउन’ में वैसे तो कोई दिक्कत नहीं होती, सुबह जाते वक्त समय पर निकलो, तो ‘एस-टी’ बस मिल ही जाती, थोड़ी देर हो जाये तो, बात नहीं कोई, सबके लिए फिर भी, ‘लक्ज़री मिनी बस’ है न … Continue reading

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