क्या कीजे ?!!!

जब चलें हवाएँ सर्द तो क्या कीजे?!
जब याद आ जाए कोई दर्द तो क्या कीजे?!

उम्र गुज़ारी है हमने रो रो कर
खुशियाँ निभाए न फ़र्ज़ तो क्या कीजे?!

भारी है पलकें अभी ख्वाबों के बोज़ से
उतरे नहीं मोहब्बत मैं क़र्ज़ तो क्या कीजे?!

नज़म -ए-दिल हम भी सुनाते अय “मुस्ताक”
जब मिले न कोई तर्ज़ तो क्या कीजे !!!

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2 Responses to क्या कीजे ?!!!

  1. મુસ્તાક says:

    शुक्रीया सर जी……

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