कहा न गया.

कहने पे आते तो बहोत कुछ था कहेने को,
पर हाल-ए-दिल के सिवा हम से कुछ कहा न गया..
बाँट दी हर खुशी सब में,
दुःख दर्द किसीका हम से देखा न गया..

बना के रख देते तस्वीर एक है रंग में ज़माने की,
पर माहोल इतना तंग था कि हम से देखा न गया..

बदल चूका है निज़ाम  ,
टूट चुके है सभी रिश्ते,
दुश्मनी कि दहलीज पर रखे हुए है जो कदम,
उस दोस्ती को हम से निभाया न गया,

जान-ओ-माल बचाते फिरते है सभी,
ऐसे में कहाँ किसीको इमान कि सुजती,
टूटती हुई उस मस्जिद कि दिवार को भी बचाया न गया,

रख दी गयी तलवार छोटी सी बच्ची की गर्दन पे,
क्या हिंदू क्या मुस्लिम, कौन  है वो खुद उसे क्या पता?
रोते हुए उसके मुह से सिवाय माँ के और कुछ कहा न गया.

सिलसिला-ए-दौर-ए-बेज़ारी ,
ता क़यामत तक शायद यूँ ही चलते रहेंगी  “मुस्ताक”,
बातें ये हर किसी के ज़हेन में कब की आ चुकी है,
पर सच क्या है ये अब तक किसी से कहा न गया..


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7 Responses to कहा न गया.

  1. rahul says:

    Very Nice Your Web side

  2. सच तो यही है – खुदा और इंसानियत ! पर अभी इसे समझने में शायद देर लगेगी, और जिसने यह बात समझ ली, बस उसी ने खुदा को पा लिया है! बहोत अच्छे मुस्ताक भाई! एक जगह पर सुधार की जरुरत है “ऐसे में कहाँ किसीको इमान कि सुजती,” – ऐसे में कहाँ किसीको इमान कि सूझती,” होना चाहिए!

  3. HABIBALI says:

    bahot badhiya….

  4. જયદીપ લીંબડ , મુંદ્રા says:

    Very Gooooood

    Mustakbhai

  5. નિરાલી says:

    एकदम सही है बोस! क्या खूब फ़रमाया है! बस आप ऐसे ही कहते रहिए, हम सुर मिलाते रहेंगे..

  6. sonal says:

    Usko chaha to bahut magar wo mila hi nahi
    Lakh koshish ki magar faasla mita hi nahi

    Usko zamane ne majboor is qadar kar diya
    Ke meri kisi sada pe wo ruka hi nahi

    Khuda se jholi phaila ke maanga tha usay
    Khuda ne meri kisi dua ko suna hi nahi

    Har aik se poocha sabab uske na milne ka
    Har aik ne bataya ke wo mere liye bana hi nahi

    Main tamaam umar ki koshish ke bawjood nakaam ho gaya
    Aur wo usko mil gaya jis ne usay kabhi maanga hi nahi

    Itni shiddat se chaha magar tu kisi aur ka ho gaya
    Shayad is jahan mai wafa ka koi sila hi nahi…

  7. बहोत ही बढ़िया सोच और उमदा पेशकश..

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