मैं पतंग बन जाऊँ…

मैं कहाँ कहाँ घूमा और कितनी राहों से गुज़रा ,
जी करता हैं मैं पतंग बन जाऊं और सारा जहान घूम आऊँ!

कितनी बड़ी है यह दुनिया और है यह सुन्दर धरा,
मैं हर डगर जाऊं और छुं लूँ वहाँ कि मिटटी,
जहां प्यासी है ज़मीन पानी के लिए,मैं ‘घनघोर’ बरस जाऊं,
शहर से दूर बस्ते हैं जो गाँव और जहां नहीं पहुंची है सड़क अभी,
कैसे जीतें है लोग वहाँ इस बात का पता लगाऊं,
जहां मुरझाएं हैं चेहरें और छीन गयी हैं खुशियाँ, वहाँ मैं ‘हरियाली’ ‘खुशहाली’ बन जाऊं!

समस्याओं की कमी नहीं हैं इस जहान में, और हैं कई बेबस और लाचार,
जी करता हैं कि मैं सबकी समस्याओंका समाधान बन जाऊं,
जहां जहां बस्ती है ऐसे इंसानों की बस्ती, मैं हर वोह जगह जाऊं,
उनके सपनोमें खो जाऊं, और उनकी उम्मीदों का दामन थाम लूँ,
मैं उनकी खुशी में झूम लूं और उदास हो जाऊं उनके दुःख में,
मैं सबकी पीडाओं को हर लूं और दारिद्र्य का विष प्राशन करनेवाला नीलकंठ बन जाऊं!

मैं काम आऊँ सदा औरोंके और नहीं बैठूं कभी चैन से,
न बनूँ बोझ कभी किसीपे, मदद करूँ हर जरूरतमंद की,
मैं हर बच्चे की मुस्कान बन जाऊं और सीने से लगा लूँ हर अनाथ को,
मैं चैन –ओ-अमन कि सृष्टि रचनेवाला विश्वकर्मा बन जाऊं,
प्यार करूँ सभी से मैं, रहूँ हमेशा हँसता और जिंदादिल हरदम,
करूँ माफ़ दुश्मन कि गलतियों को भी, और सुख का ‘श्राप’ देनेवाला ‘ऋषि ‘ बन जाऊं!

मैं कहाँ कहाँ घूमा और कितनी राहों से गुज़रा ,
जी करता हैं मैं पतंग बन जाऊं और सारा जहान घूम आऊँ ,
कितने हैं लोग ‘दुखी’ और ‘बेहाल’ इस जहांन में अभी,
मैं उन सबसे मिलूं और सबका हाल जानू ,
इंसानियत की बातें करूँ और आशा कि किरण जगाऊं,
मुझे इतना बड़ा बना दे हे इश्वर, की सबको अपनी बाँहों में समेट लूँ और साथ ले चलूँ सबको ,
मैं सबकी चिंताएं मिटानेवाली चिता बन जाऊं और पंचतत्व में विलीन हो जाऊं!

( मेरे स्वर्गवासी पूज्य ‘बाबा’ (पिताजी) जिनका दिनांक ०९.०१.२०११ को देहावसान हुआ, को समर्पित )

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11 Responses to मैं पतंग बन जाऊँ…

  1. Anjali says:

    H A P P Y B I R T H D A Y !!!

    and what a wonderful gift you have given sir…

    I pray dear God to give you powers to be all you want in this beautiful poem..
    I salute your values and your wonderful wonderful thoughts..

    mmmmmmmmmmmmmmmmmmwah…

    may you live a loooooooooooong life n keep spreading luv and positiveness ..

    -Anjali.

  2. Scrapwala says:

    Thanks, i am overwhelmed to your response….On ‘long life’ i always remember
    a diagloue from Rajesh Khanna starrer ‘Anand’- ‘ Zindagi badi honi chahiye Babu
    Moshay, Lambi nahin’…., i hope that i fully live and contribute to the purpose…

  3. it’s very touching. i hope god fulfill what u wish for. u are always like a kite to us to us the right path and to bring smile on our face.i wish u fulfill your dream to make all happy.

  4. નિરાલી says:

    Wow Avinashji.. Very nice return gift to us.. Thank you.. And again a post which shows the sweetness of your heart n your helping nature.. Hope you can do what you wished.. Keep spreading your positive energy..

  5. Hema says:

    समस्याओं की कमी नहीं हैं इस जहान में, और हैं कई बेबस और लाचार,
    जी करता हैं कि मैं सबकी समस्याओंका समाधान बन जाऊं,
    जहां जहां बस्ती है ऐसे इंसानों की बस्ती, मैं हर वोह जगह जाऊं,
    उनके सपनोमें खो जाऊं, और उनकी उम्मीदों का दामन थाम लूँ,
    मैं उनकी खुशी में झूम लूं और उदास हो जाऊं उनके दुःख में,
    मैं सबकी पीडाओं को हर लूं और दारिद्र्य का विष प्राशन करनेवाला नीलकंठ बन जाऊं!

    Superb Lines…

  6. હાર્દિક પીઠડીયા says:

    very nice lines sir….

  7. bharat bhatt says:

    Really nice one….Just like a flying “KITE”… so generous and positive. If each human being start thinking like you..the whole world will become one family where only happiness will live. There will be no sorrow, no pain..just love. I remember one nice film song’s line “Jaha gam bhi na ho, aansu bhi na ho bas pyar hi pyar pale”. Keep it up …

  8. Scrapwala says:

    Dear Hardik & Bharat bhai, thanks ! and Bharat we await your first on ‘nai-aash’!

  9. આશિષ says:

    Congrats Sirji…

    This is the first post to cross 1,000 views on our blog!

    Don’t let your kalam to dry up and post few more of these!!

  10. @ Ashish – thanks ! this has been possible because of you only…
    i will definately try to post more and in fact part -2 of this poem , would be there today only… 🙂

  11. Pingback: मैं पतंग बन जाऊँ… 2… | Samaj Shilpi

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